Indian Ginseng

अश्वगंधा सदियों से भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह एक जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग कई वर्षों से किया जा रहा है। अमेरिका और अफ्रीका के मूल निवासियों द्वारा इसे संक्रामक बीमारियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। अश्वगंधा के पौधे और इसके औषधीय गुणों का वर्णन पारंपरिक चीनी चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों में व्यापक रूप से किया गया है। इसे भारतीय जिनसेंग के नाम से भी जाना जाता है।

अश्वगंधा का अर्थ है “घोड़े की गंध”। इसका यह नाम इसलिये पड़ा क्योंकि इसकी जड़ में से आने वाली गंध घोड़े के पसीने की गंध जैसी होती है। इस जड़ी-बूटी का मूल भारत में है और यह सूखे क्षेत्रों में सबसे अच्छी तरह बढ़ता है। यह एक मजबूत पौधा है जो बहुत ऊंचे तापमान (40°C) और बहुत कम तापमान (10°C) के अंतर में भी जीवित रह सकता है।

अश्वगंधा को दैनिक तनाव कम करने के साथ-साथ सामान्य टॉनिक के रूप में भी उपयोग किया जाता है। कुछ लोग इसे अपनी सोचने की शक्ति को बढ़ाने, सूजन और दर्द कम करने के साथ-साथ बढ़ती उम्र की समस्याओं को कम करने के लिए भी उपयोग करते हैं। अश्वगंधा, अपने सूजन कम करने के गुण, एंटीऑक्सीडेंट और तनाव कम करने के गुण के साथ, हृदय रोगों के लिए अच्छा है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

अश्वगंधा खाने से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम हो जाती है जिससे हृदय की बीमारियों की संभावना कम हो जाती है। इसमें मौजूद ऑक्सीडेंट आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं, जो आपको सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। अश्वगंधा वाइट ब्लड सेल्स और रेड ब्लड सेल्स दोनों को बढ़ाने का काम करता है, जो कई गंभीर शारीरिक समस्याओं में लाभदायक है।

अश्वगंधा मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्या को ठीक करने में लाभदायक है। एक रिपोर्ट के अनुसार, तनाव को 70 प्रतिशत तक अश्वगंधा के उपयोग से कम किया जा सकता है। यह आपके शरीर और मानसिक संतुलन को ठीक रखने में असरकारी है और इससे अच्छी नींद आती है। अश्वगंधा कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में भी बहुत असरकारी है। कई शोधों में यह बताया गया है कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है और नए कैंसर सेल्स नहीं बनने देता। यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज का निर्माण करता है, जो कैंसर सेल्स को खत्म करने और कीमोथेरपी से होने वाले साइड इफेक्ट्स से भी बचाने का काम करता है।

अश्वगंधा का उपयोग आपकी आँखों की रोशनी को बढ़ाने में भी मदद करता है। रोज़ दूध के साथ लेने से आँखों के अलावा स्ट्रेस से भी बचा जा सकता है।

अश्वगंधा का सेवन करते समय ध्यान देने योग्य बातें:

  1. अश्वगंधा का ज्यादा प्रयोग आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से बुखार, थकान और दर्द की शिकायत हो सकती है।
  2. अश्वगंधा का अधिक उपयोग पेट के लिए हानिकारक हो सकता है और इससे डायरिया की समस्या हो सकती है। इसलिए इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
  3. ब्लड प्रेशर से ग्रस्त लोगों को अश्वगंधा डॉक्टर के परामर्श से ही लेना चाहिए। जिनका बीपी लो होता है, उन्हें अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  4. अश्वगंधा का सही डोज़ न लेने से उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  5. अश्वगंधा का इस्तेमाल नींद के लिए अच्छा है, लेकिन इसका बहुत दिनों तक इस्तेमाल आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

अश्वगंधा प्रकृति का दिया हुआ अमूल्य वरदान है, जिसे कई तरह की रोगों के लिए आयुर्वेदिक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है, पर इसका सेवन करने का तरीका हमें मालूम होना चाहिए। बाजार में अश्वगंधा की जड़ पाउडर में, सूखे रूप में या ताज़ा जड़ के रूप में उपलब्ध होती है। आजकल पतंजलि के भी अश्वगंधा कैप्सुल या पाउडर बाजार में उपलब्ध हैं।

आप अश्वगंधा पाउडर को 10 मिनट के लिए पानी में उबालकर अश्वगंधा की चाय बना सकते हैं (एक कप पानी में एक चम्मच से अधिक न दें)। आप सोने से पहले अश्वगंधा जड़ के पाउडर को गर्म दूध के एक गिलास के साथ भी ले सकते हैं। अश्वगंधा शरीर में आयरन को बढ़ा देता है, हर दिन तीन बार 1-1 ग्राम सेवन करने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ सकती है। इससे हमारे शरीर की पाचन शक्ति भी अच्छी होती है।